दास्तान हमारी
समय रेत की तरह बहता चला गया और आज जब महसूस हुआ की उनसे मिले एक साल बीत गया था तो मानो मैं कुछ पल रुक कर पीछे मुड़ कर पुरानी यादो को देखना चाहती थी , हमारे वो साथ बिताए पल ,वो बाते ,वो वादे जो हमने एक दूसरे से किये थे , वो लड़ाई झगड़ा जिसके बिना हम रह नहीं सकते थे, वो मेरा छोटी छोटी बातो पे रूठ जाना और फिर उनका मुझे प्यार से मानना। भले ही हम लडे झगडे पर आज जब उन्हें पहले की तरह ही अपने साथ पाती हूँ तो एक अलग ही ख़ुशी होती है। उनसे बात करते वक़्त आज भी कई बार मेरी आँखे भर आया करती है। जब वो शब्दों से अपना प्यार जताते है। उन्हें जब जब खुद से दूर किया था तब तब एक बेचैनी सी रही में ,शायद में ही इतनी बेवक़ूफ़ थी की समझ पायी,कितने इत्तेफ़ाक़ की बात रही की जब जब में उनसे प्यार का इज़हार करने को जिझकि तब तब मेरी दिल की बात उन्होंने ही कह दी। आज जब किसी को उनके और मेरे बारे में बताती हूँ तो शायद मेरे शब्दों से ज्यादा मेरी मुस्कान मेरा प्यार बया कर देती है। कुछ रोज़ पहले जब उन्होंने कहा की जानने दो दुनिया को कितना प्यार करता हु तुमसे तो दो पल के लिए लगा की शायद दुनिया जीत ली है मैंने। ना जा...