इत्तेफ़ाक़

तुम्हरा मेरी ज़िन्दगी में इस क़दर आना किसी इत्तेफ़ाक़ से कम नहीं था।
आज भी याद वो दिन जब अपने दोस्तो के साथ खड़े तुम लगातार मुझे ही ताक रहे, की तुम्हारी नज़रे मुझसे हटने का नाम नहीं ले रही थी और तुम्हे कोई फर्क नहीं पड़ा था जब तुम्हारे दोस्तों ने तुम्हे रंगे हाथो पकड़ लिया था।
वो मुस्कान मेरी आज भी वैसी ही है जैसी उस दिन तुम्हारे दोस्तों के सामने थी।
आज भी कोई तुम्हारा नाम लेता है तो वो मुस्कान बेझिजक मेरे होठों पे आ जाती है।
वो मुस्कान ही तो है जिसकी वजह से वो लोग आज भी जान जाते है की ये कहानी आपकी और मेरी कभी खत्म  ही नहीं हुई थी, की आज भी उतना ही प्यार है आपके मेरे दरमियाँ जितना तब था।
बस कुछ बुरी नज़रे है ना वरना पूरी दुनिया को बताते हम की कितना प्यार करते है आज भी आपसे।
की वो ख़त जो लिखे थे आपको गुस्से में जला दिए थे पर आपका नाम और आपकी यादे कहाँ जाने वाली थी, वो तो आज भी मेरे दिल और दिमाग पर राज करती है।

इतनी तारीफ़ तुम्हारी  कभी तुम्हारे सामने करु क्योकि ये जो बिना तुम्हारे नाम लिखे तुम्हारी बाते करती  हु ना उसकी बात ही अलग है।

आपसे रूठने की अदा है हमारी क्योकि जब इतने प्यार से मनाते हो ना आप तो  हमारा प्यार आपके लिए और भी गहरा  हो जाता है।
ये जो ज़िद्द करके सारी बाते मनवा लेते हो ना वो तो मैं वैसे भी पूरी कर देती पर तेरी ज़िद्द में छुपे प्यार को कैसे देख पाती फिर।
ये जो हक़ है ना आपका मुझपे वो और किसी का नहीं।

रिश्ता तो वो है ना सच्चा जिसमें बहूत सारा प्यार हो ना की झूठ और फरेब।
तो क्या हुआ की दुनिया को नहीं बताना की कौन हो आप, बात तो ये है ना की कितना प्यार करते हो हमसे।

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