Poem: वो आसमान

कभी आसमान को देखा है रात भर बैठे, काले आसमान में चमकता हुआ चाँद कितना सुन्दर लगता है शायद ही कभी ध्यान दिया हो तुमने,
कभी उस आसमान को सुनाई गयी कहानिया सुनी है तुमने, कितनी कहानिया है उस काले आसमान में शायद कभी तुमने ध्यान ही नहीं ,
कभी ढलते सूरज को अपने राज़ बताए है, जानते हो वो किसी को नहीं बताएगा पर शायद तुमने कभी उसकी खूबसूरती के अलावा कही ध्यान ही नहीं दिया ,
कभी खुले आसमान के तले अपनी ज़िन्दगी की सारी परेशानियों को एक परे रखकर देखा है , कितना अच्छा एहसाह होता , पर शायद तुम उन्हें अपने कंधे पर लेके चलने में ज्यादा मशरूफ थे,
कभी बारिश की बूंदो को हाथ में लिया है , कितनी बेपरवाह होती है वो , कोई फ़िक्र नहीं की कितनी उचाई से गिरती है वो ज़मीन की प्यास बुझाने के लिए ,
कभी आँखे बंद करके सुना है हवायें क्या गुनगुनाती है , शायद तुमने हमेशा खामोश ही पाया है , क्योकि उनकी भाषा बंद आँखों से ही समझी जाती है ,
कभी सोचा है ये आसमान ना होता तो ज़िन्दगी ना होती इस धरती पर , पर शायद तुम अपनी ज़िन्दगी की भाग-दौड़ ज्यादा ही खो गए हो ,
कभी समय मिले तो सुना क्या कहता है ये , हैरान रह जाओगे की कैसे एंटी कहानिया रखता है ये खुद में समेटे ,
कभी कहना इसे अपनी कुछ बाते , अलग ही सुकून मिलेगा ,
कभी बैठना इस आसमान के तले , ये कभी खावा नहीं होगा , कभी नाराज़ नहीं।

""वो राते भी कितनी अजीब है ना जो तुम्हारा एहसास लेके आती है और सुबह कही गुम हो जाती है। ""

Instagram: ira.pandey1803, imperfect_ira 💗

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