Poem: शायद आज कुछ अलग होता

काश कभी तुम्हे दो पल रोक कर दिल का हाल सुनाया होता तो आज शायद कुछ अलग होता।
काश उस दिन तुमसे नज़रे मिलाई होती तो शायद आज कुछ अलग होता। 
काश उस दिन थोड़ी और हिम्मत दिखाई होती तो शायद आज कुछ अलग होता। 
काश पहले से पता होता की तुम्हे दूर से चाहना दिन-ब -दिन मुश्किल हो जाएगा तो शायद आज कुछ अलग होता। 
काश तुम मेरी आँखों की वो अनकही बाते पढ़ लेते तो शायद आज कुछ अलग होता। 
काश यू तुम्हे दूर ना किया होता खुद से तो शायद आज कुछ अलग होता। 
काश तुम्हे एक बार कहा होता की टूट रही हूँ अंदर से मैं तो शायद आज कुछ अलग होता। 
काश एक बार तुमने पूछा होता हमसे तो शायद आज कुछ अलग। 
काश उस दिन तुम्हे सच बताया होता तो शायद आज कुछ अलग होता। 

काश ये काश वो !!
काश हम काश तुम !!

तो शायद आज हम कुछ अलग होते। 
तो शायद आज तुम कुछ अलग होते। 

तो शायद आज हम अलग ना होते !!

Instagram: imperfect_ira 

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